लावारिस संपत्ति (Unclaimed Wealth): एक छिपा हुआ खजाना और उसे वापस पाने की आसान गाइड

अपनी संपत्ति का दावा (Unclaimed Wealth Claim): एक छिपा हुआ खजाना और उसे वापस पाने की आसान गाइड

अपनी संपत्ति का दावा (Unclaimed Wealth Claim): एक छिपा हुआ खजाना और उसे वापस पाने की आसान गाइड

भारत में एक बहुत बड़ी वित्तीय समस्या चुपचाप पैर पसार रही है, जिसे 'लावारिस संपत्ति' (Unclaimed Wealth) कहा जाता है। यह वह पैसा है जो बैंकों, बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंड और विभिन्न सरकारी बचत योजनाओं के पास पड़ा है, लेकिन इसका कोई दावेदार नहीं आ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, भारतीय वित्तीय प्रणाली में ₹1 लाख करोड़ से अधिक की राशि लावारिस पड़ी है। यह पैसा आपका या आपके किसी पूर्वज का हो सकता है।

इस लेख में हम बहुत ही आसान भाषा में समझेंगे कि लोग अपनी संपत्ति का दावा करना क्यों भूल जाते हैं, यह पैसा कहाँ जमा होता है, और सबसे बड़ा भ्रम—नॉमिनी (Nominee) बनाम कानूनी वारिस (Legal Heir) का सच क्या है।


1. सबसे बड़ा भ्रम: नॉमिनी = मालिक (The Big Myth)

आम जनता में यह सबसे बड़ी गलतफहमी है कि यदि किसी ने बैंक खाते या संपत्ति में किसी को 'नॉमिनी' (नामांकित व्यक्ति) बना दिया है, तो वह व्यक्ति उस संपत्ति का मालिक बन गया। यह पूरी तरह गलत है।

  • नॉमिनी सिर्फ एक ट्रस्टी (Trustee) या केयरटेकर है: कानून की नजर में नॉमिनी केवल एक 'रखवाला' है। खाताधारक की मृत्यु के बाद बैंक या वित्तीय संस्था सारा पैसा नॉमिनी के हाथ में सौंप देती है ताकि कानूनी प्रक्रिया आसान हो सके।
  • असली मालिक कानूनी वारिस (Legal Heir) होता है: नॉमिनी को वह पैसा अपने पास रखने का अधिकार नहीं है। उसे वह संपत्ति मृतक के कानूनी वारिसों (जैसे- पत्नी, बच्चे, माता-पिता) को कानून या वसीयत के अनुसार सौंपनी होती है। यदि नॉमिनी खुद भी एक कानूनी वारिस है, तो उसे केवल अपना कानूनी हिस्सा मिलेगा, पूरा पैसा नहीं।
एक आसान उदाहरण से समझें (Illustration): मान लीजिए रमेश के बैंक खाते में ₹10 लाख जमा हैं। उसने अपने मित्र सुरेश को नॉमिनी बनाया था। अचानक रमेश का निधन हो जाता है।

अब बैंक नियम के अनुसार वह ₹10 लाख सुरेश (नॉमिनी) को दे देगा। लेकिन सुरेश उस पैसे का मालिक नहीं बन जाता। रमेश की पत्नी और बच्चों (कानूनी वारिसों) का उस पैसे पर असली अधिकार है। सुरेश की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वह पूरा पैसा रमेश के परिवार को सौंपे।

क्या होगा अगर कोई नॉमिनी ही न हो? (If there is No Nominee)

यदि किसी संपत्ति में कोई नॉमिनी नहीं है और खाताधारक की मृत्यु हो जाती है, तो प्रक्रिया काफी जटिल हो जाती है। ऐसी स्थिति में कानूनी वारिसों को अपनी सत्यता साबित करने के लिए कोर्ट से 'सक्सेशन सर्टिफिकेट' (Succession Certificate) या 'लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' बनवाना पड़ता है, जिसमें काफी समय और पैसा खर्च होता है।


2. लोग अपनी संपत्ति का दावा करना क्यों भूल जाते हैं? (Conditions)

ऐसी कई व्यावहारिक परिस्थितियां हैं जिनकी वजह से करोड़ों रुपये वित्तीय संस्थानों में लावारिस पड़े रह जाते हैं:

  • अचानक मृत्यु और जानकारी का अभाव: यदि परिवार के मुख्य सदस्य की अचानक मृत्यु हो जाती है और उसने अपने निवेश की जानकारी परिवार को नहीं दी थी, तो वह पैसा अनक्लेम्ड रह जाता है।
  • घर बदलने पर पता न बदलना: पुराने समय में कागजी दस्तावेज चलते थे। लोग घर बदल लेते थे और नए पते की जानकारी बैंक या कंपनी को देना भूल जाते थे।
  • पुराने दस्तावेज या सर्टिफिकेट खो जाना: शेयर, बॉन्ड या फिक्स्ड डिपॉजिट के फिजिकल सर्टिफिकेट खो जाने या फट जाने के कारण कई लोग दावा नहीं कर पाते।
  • निष्क्रिय खाते (Inactive Accounts): कई लोग नौकरी बदलने पर पुराना सैलरी अकाउंट या पीएफ खाता बंद करना या ट्रांसफर करना भूल जाते हैं।
  • महिला निवेशकों के नाम में बदलाव: शादी के बाद कई महिलाओं का सरनेम बदल जाता है, जिससे उनके पुराने निवेश और नए पहचान पत्रों के नाम मैच नहीं खाते।

3. वो सेक्टर्स जहाँ सबसे ज्यादा पैसा लावारिस पड़ा है (Segments)

लावारिस संपत्ति मुख्य रूप से इन बड़े वित्तीय क्षेत्रों में पाई जाती है:

  • बैंक खाते (Savings/Current & FDs): यदि किसी बैंक खाते या फिक्स डिपॉजिट (FD) में लगातार 10 साल तक कोई लेन-देन न हो, तो बैंक उसे अनक्लेम्ड डिपॉजिट मान लेते हैं।
  • जीवन बीमा पॉलिसियां (Life Insurance): पॉलिसी मैच्योर होने के बाद भी कई लोग क्लेम सेटलमेंट नहीं कराते, या मृत्यु के बाद परिवार क्लेम करना भूल जाता है।
  • शेयर और डिविडेंड (IEPF): कंपनियों के ऐसे शेयर या डिविडेंड जो 7 साल तक क्लेम नहीं किए जाते, वे सरकार के Investor Education and Protection Fund (IEPF) खाते में चले जाते हैं।
  • कर्मचारी भविष्य निधि (EPF): पुरानी कंपनियों को छोड़ने के बाद लाखों कर्मचारी अपना पीएफ का पैसा निकालना या नए खाते में ट्रांसफर करना भूल जाते हैं।

4. लावारिस संपत्ति को वापस कैसे पाएं? (How to Recover)

इस सोए हुए पैसे को खोजने और वापस पाने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक (RBI) ने अब डिजिटल प्रक्रियाएं शुरू की हैं:

  • बैंकों के लिए (UDGAM Portal): RBI ने एक सेंट्रलाइज्ड पोर्टल UDGAM शुरू किया है। यहाँ आप अपना नाम और पैन कार्ड डालकर देश के अधिकांश बैंकों में लावारिस पड़े पैसे की जांच एक ही जगह कर सकते हैं। नाम मिलने पर बैंक शाखा में KYC और डेथ सर्टिफिकेट (यदि लागू हो) जमा कर क्लेम कर सकते हैं।
  • शेयर और डिविडेंड के लिए (IEPF): यदि आपके पुराने फिजिकल शेयर गायब या ट्रांसफर हो चुके हैं, तो आपको IEPF की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर फॉर्म IEPF-5 भरना होता है।
  • म्यूचुअल फंड और बीमा: CAMS या Karvy जैसी म्यूचुअल फंड रजिस्ट्रार वेबसाइट्स और सभी बीमा कंपनियों की वेबसाइट पर 'Unclaimed Amounts' चेक करने का सीधा विकल्प उपलब्ध होता है।

भविष्य के लिए जरूरी सीख (Key Takeaways)

अपनी गाढ़े पसीने की कमाई को लावारिस होने से बचाने के लिए आज ही ये कदम उठाएं:

  1. अपने हर बैंक खाते, डीमैट, पीएफ और इंश्योरेंस में नॉमिनी का नाम जरूर अपडेट करें
  2. एक 'फाइनेंशियल डायरी' बनाएं जिसमें आपके सभी निवेश दर्ज हों और इसकी जानकारी परिवार के साथ साझा करें।
  3. अपने सभी खातों में KYC, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी हमेशा चालू और अपडेट रखें
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। लावारिस संपत्ति का दावा करने की कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग वित्तीय संस्थानों के नियमों और मृतक की वसीयत/कानूनी वारिस की स्थिति के आधार पर भिन्न हो सकती है। किसी भी बड़े वित्तीय या कानूनी दावे के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें।

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